रविवार, जुलाई 10, 2005

परिचय

madan arora

9 फरवरी 1945 को जन्में श्री मदन अरोड़ा बी॰एस॰सी; एम॰ए॰ एवं आयुर्वेद रत्न करने के बाद स्टेट बैंक आफ बीकानेर एण्ड जयपुर में कार्यरत हैं। हिन्दी साहित्य की– कहानी, लघुकथा, कविता, लेख एवं हाइकु विधाओं में आप सृजन कर रहे हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकें हैं–कुसुम (शायरी संग्रह) ; 'बूँद भी सागर भी' (क्षणिका संग्रह )।
विभिन्न पत्र–पत्रिकाओं में मदन आपके लेख, कहानियाँ, लघुकथाएँ, कविताएँ, क्षणिकाएँ एवं हाइकु कविताएँ नियमित प्रकाशित हो रही हैं।
आकाशवाणी के सूरतगढ़ केन्द्र से आपकी कहानियाँ एवं आलेखों का प्रसारण होता रहता है।
हाइकु दर्पण मे आपकी हाइकु कविताएँ प्रकाशित हुई हैं।
सम्पर्क-
132 मुखर्जी नगर
श्री गंगानगर (राज॰)
पिन—335001
फोन—0154–2480132

हाइकु कविताएँ

प्यारी है दूब
देते रहना पानी
जाए न सूख।

***

चलेंगे हम
इक्कीसवीं सदी में
लेकर बम।

***

कम बोले है
मगर ये हाइकु
पूरा तोले है।

***

आसां नहीं है
बन जाए हरेक
आदमी वृक्ष।

***

परख होती
अपनों–बेगानों की
मुसीबतों में।

***

शोर ही शोर
शांति प्रिय देश में
हिंसा का जोर।

***

प्रेम इंसां को
सतरंगी बनाता
श्वेत–श्याम से।

***

कितनी दौड़
दौड़ रहा आदमी
पर मंजिल?

***

पैसा तो पास
कितनों के ही पर
मन उदास।

***

कल न आया
कल–कल करते
जन्म गंवाया।

***

तू मेरे साथ
क्या–बचा है देने को
खुदा के पास।

***

कुछ प्रश्नों के
उत्तर ये जिन्दगी
कभी न देती।

***

सुख को खोजें
दुसरों के सुख में
सुखी हों लोग।

***

लूट–लूट के
सब यहीं छोड़ता
फिर क्यों लूट?

***

बड़े बेशर्म
मई–जून के माह
गर्म ही गर्म।

***

-मदन अरोड़ा

मदन अरोड़ा की हाइकु कविताएँ


देखो बच्चे
बड़े मत बनना
ये दिन अच्छे।

***


पतंग टूटी
धनी है वो बालक
जिसने लूटी।

***

ओस की बूँद
शरमा गई देख
मुखड़ा तेरा।

***

धूप का चश्मा
तूने लगाया मिली
ठंडक मुझे।

***

प्रिया तुम्हारी
क्या तुलना फूलों से
क्या खुशबू से।

***

खिलें हो फूल
जैसे बरसात में
कैसे हो तुम।

***

खूबसूरत
कितनी हैं जिन्दगी ?
जीना कठिन।

***

दिन हमारे
त्यौहार बन जाते
साथ तुम्हारे।

***

ऐसा रंगेगे
बिन मेकप आज
साजन सजेंगे।

***

ओ मेरे साथी
रहो कहीं भी पर
लिखना पाती।

***

बुढ़ापा आया
करोगे चिकचिक
दुख पाओगे।

***

-मदन अरोड़ा

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